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Tag Archives: Hindi Sahitya
चारु चंद्र की चंचल किरणें – मैथिलीशरण गुप्त(पंचवटी)
चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं थीं जल थल में। स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई थी, अवनि और अम्बर तल में। पुलक प्रकट करती थी धरती, हरित तृणों की नोकों से। मानो झूम रहे हों तरु भी, मन्द पवन के … Continue reading
चारु चंद्र की चंचल किरणें – मैथिलीशरण गुप्त(पंचवटी)
चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं थीं जल थल में। स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई थी, अवनि और अम्बर तल में। पुलक प्रकट करती थी धरती, हरित तृणों की नोकों से। मानो झूम रहे हों तरु भी, मन्द पवन के … Continue reading