Category Archives: Hindi Sahitya

शून्य का आविष्कार – How the world knew about zero – I

कितना कुछ दिया है विश्व को हिंदुओं और हिंदू संस्कृति ने! हिंदू संस्कृति का अपना एक विशेष गौरव रहा है| हिंदुओं के प्राचीन ग्रंथों के मंथन से आज भी बहुत कुछ प्राप्त करने की आशा की जा सकती है| धन्य … Continue reading

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यहाँ और वहाँ में क्या है फ़र्क

यहाँ और वहाँ में क्या है फ़र्क? पेश हैं कुछ ताजा तर्क वहाँ के लोग बनाए घर यहाँ के builders बनाए house वहाँ के बिल पाले चूहें यहाँ के Bill बेंचे mouse वहाँ के लोग करे missed call यहाँ के … Continue reading

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जीवन की आपाधापी में

जीवन की आपाधापी में कब वक़्त मिला कुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूँ जो किया, कहा, माना उसमें क्या बुरा भला। जिस दिन मेरी चेतना जगी मैंने देखा मैं खड़ा हुआ हूँ इस दुनिया के मेले में, … Continue reading

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आराम करो

आराम करो एक मित्र मिले, बोले, “लाला, तुम किस चक्की का खाते हो? सौ -दो सौ ग्राम के राशन में भी तोंद बढ़ाए जाते हो। क्या रक्खा माँस बढ़ाने में, मनहूस, अक्ल से काम करो। संक्रान्ति-काल की बेला है, मर … Continue reading

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मेरा भगत सिंह – सरदार तुक तुक

एक बार हम पति पत्नी में हो गया झगड़ा। कि बेटा क्या बनेगा जब हो जाएगा बड़ा। मेरी पत्नी को डाक्टर पसन्द हैं। इसलिए बेटे के लिए सारे आप्शन बंद हैं। जब मेरी पत्नी ने मुझसे यह कहा तो मेरा … Continue reading

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यमराज का इस्तीफा

एक दिन यमदेव ने दे दिया अपना इस्तीफा। मच गया हाहाकार बिगड़ गया सब संतुलन, करने के लिए स्थिति का आकलन, इन्द्र देव ने देवताओं की आपात सभा बुलाई और फिर यमराज को कॉल लगाई। ‘डायल किया गया नंबर कृपया … Continue reading

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सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है (Sar faroshi ki tammana, aab humare dil mai hai)

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है – By Ram Prasad Bismil सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है । करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे … Continue reading

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वीरों का कैसा हो बसन्त।।

आ रही हिमालय से पुकार है उदधि गरजता बार बार प्राची पश्चिम भू नभ अपार सब पूछ रहे हैं दिग-दिगन्त- वीरों का कैसा हो बसन्त।। फूली सरसों ने दिया रंग मधु लेकर आ पहुँचा अनंग वधु वसुधा पुलकित अंग अंग … Continue reading

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बचपन की यादे , मछली जल की रानी है , पोशम्पा भाई पोशम्पा

बचपन की यादे — क्या आप इन्ही में से किसी कविता में अपना बचपन खोया हुआ देख पाते है ? मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है। हाथ लगाओ डर जायेगी बाहर निकालो मर जायेगी। ************ पोशम्पा भाई … Continue reading

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बड़ों के साथ अब हम भी बड़े हो गए

  बड़ों के साथ अब हम भी बड़े हो गए अब हम भी बात करने से पहले सोचते है और फिर कहते हैं वो बात जिसमें दिल कुछ और कहता है और जुबां कुछ वाकई अब हम बड़े हो गए … Continue reading

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