Monthly Archives: July 2010

धूप सफ़ेद क्यों नज़र आती है ?

प्राथमिक रंग दो प्रकार के होते हैं. एक तो वो जो प्रकाश के रंग होते हैं लाल, हरा और नीला. और दूसरे वो जो पिगमेंट्स यानी पदार्थों के रंग होते हैं. यानी वे जिनका प्रयोग हम पेंटिंग आदि में करते … Continue reading

Posted in जिज्ञासा | 2 Comments

नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं

नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं बोलो मेरे संग जयहिन्द-जयहिन्द रास्ते पर चलूंगा न डर-डर के,चाहे मुझे जीना पडे मर-मर के मंझिल से पहले न लूंगा कहीं दम आगे ही आगे बढाऊंगा कदम, दायें बायें,2…थम नन्हा मुन्ना राही… … Continue reading

Posted in Deep Thinkers and Fools, Indian Culture, जिज्ञासा | 1 Comment

धूम्रपान एक कार्य महान -सिगरेट सुलगाओ

सिगरेट है संजीवनी पीकर स्वास्थ्य बनाओ समय से पहले बूढ़े होकर रियायतों का लाभ उठाओ सिगरेट पीकर ही हैरी और माइकल निकलते हैं दूध और फल खाकर तो हरगोपाल बनते हैं जो नहीं पीते उन्हें इस सुख से अवगत कराओ … Continue reading

Posted in Deep Thinkers and Fools, जिज्ञासा | 1 Comment

हमें प्यास क्यों लगती है?

हमें प्यास क्यों लगती है? हमें प्यास इसलिए लगती है क्योंकि हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाती है. हमारा शरीर जिन तत्वों से बना है उनमें दो तिहाई पानी है. पानी के बिना हम पाँच से दस दिन … Continue reading

Posted in जिज्ञासा | Leave a comment

अपना गम ले के कहीं और न जाया जाये

अपना गम ले के कहीं और न जाया जाये घर मे बिखरी हुई चीजों को सजाया जाये जिन चिरागों को हवाओं का कोई खौफ नही उन चिरागों को हवाओं से बचाया जाये बाग मे जाने के अदब हुआ करते हैं … Continue reading

Posted in Deep Thinkers and Fools, Hindi Sahitya | 4 Comments

इंदौर(मध्यप्रदेश) की यादे!!

Indore(Madhya Pradesh) ki Yaadain !! देश मालवा गहन गंभीर डग डग रोटी पग पग नीर – अमीर खुसरो Woh Cloth Market wale Ghanshyaam ki pani puri, woh 56 ki coffee, Woh Top’n Town ki ice cream, Wah usme thi kya … Continue reading

Posted in Deep Thinkers and Fools, Hindi Sahitya, Indian Culture, जिज्ञासा | 1 Comment

मुश्किल है अपना मेल प्रिये

मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये तुम MA फर्स्ट डिविजन हो, मैं हुआ मेट्रिक फेल प्रिये मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही … Continue reading

Posted in Deep Thinkers and Fools, Hindi Sahitya | 4 Comments

तिरंगा – सरदार तुक तुक

इस बार जैसे ही पन्द्रह अगस्त का दिन पास आया। हमारे दिमाग में एक जबरदस्त आइडि़या जगमगाया। चलो इस बार स्वतंत्रता दिवस घर पे मनाते हैं। अपने ही आंगन में तिरंगा फहराते हैं। सो हमने तिरंगा खरीदने के लिए मार्किट … Continue reading

Posted in Hindi Sahitya | Leave a comment

दीपावली की शुभकामनाएँ !

केवल छज्जों और चौबारों पर  ही नहीं, आस्था का एक दीप हमारे  रिश्तों की मुंडेर पर भी आजीवन जलता रहे इसी भावना के  साथ दीपावली की शुभकामनाएँ ! – Infovinity Systems Pvt. Ltd. Tags: दीपावली

Posted in Hindi Sahitya, जिज्ञासा | Tagged | Leave a comment

लड़का या लड़की – सरदार तुक तुक

एक बार हमने अपने पिता जी के ज़मीर को ललकारा। उन्होंने करा दिया ब्याह हमारा। बोले बेटा अब महीने भर बाद बात करेंगें। हमने कहा हम न किसी से डरे हैं न डरेंगे। पिता जी बोले बेटा शादी से पहले … Continue reading

Posted in Hindi Sahitya | Leave a comment