-
Recent Posts
Recent Comments
- kanu kumawat on Hinduism – an Intorduction
- E-Guru Rajeev on About Infovinity Systems
- डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच on रामसेतु तथा राम के युग की प्रामाणिकता – Ramsetu, RaamSetu
- Nageshwar on यमराज का इस्तीफा
- Abhishek Sharma on चारु चंद्र की चंचल किरणें – मैथिलीशरण गुप्त(पंचवटी)
Archives
Categories
Monthly Archives: July 2010
धूप सफ़ेद क्यों नज़र आती है ?
प्राथमिक रंग दो प्रकार के होते हैं. एक तो वो जो प्रकाश के रंग होते हैं लाल, हरा और नीला. और दूसरे वो जो पिगमेंट्स यानी पदार्थों के रंग होते हैं. यानी वे जिनका प्रयोग हम पेंटिंग आदि में करते … Continue reading
Posted in जिज्ञासा
2 Comments
नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं
नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं बोलो मेरे संग जयहिन्द-जयहिन्द रास्ते पर चलूंगा न डर-डर के,चाहे मुझे जीना पडे मर-मर के मंझिल से पहले न लूंगा कहीं दम आगे ही आगे बढाऊंगा कदम, दायें बायें,2…थम नन्हा मुन्ना राही… … Continue reading
Posted in Deep Thinkers and Fools, Indian Culture, जिज्ञासा
1 Comment
धूम्रपान एक कार्य महान -सिगरेट सुलगाओ
सिगरेट है संजीवनी पीकर स्वास्थ्य बनाओ समय से पहले बूढ़े होकर रियायतों का लाभ उठाओ सिगरेट पीकर ही हैरी और माइकल निकलते हैं दूध और फल खाकर तो हरगोपाल बनते हैं जो नहीं पीते उन्हें इस सुख से अवगत कराओ … Continue reading
Posted in Deep Thinkers and Fools, जिज्ञासा
1 Comment
हमें प्यास क्यों लगती है?
हमें प्यास क्यों लगती है? हमें प्यास इसलिए लगती है क्योंकि हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाती है. हमारा शरीर जिन तत्वों से बना है उनमें दो तिहाई पानी है. पानी के बिना हम पाँच से दस दिन … Continue reading
Posted in जिज्ञासा
Leave a comment
अपना गम ले के कहीं और न जाया जाये
अपना गम ले के कहीं और न जाया जाये घर मे बिखरी हुई चीजों को सजाया जाये जिन चिरागों को हवाओं का कोई खौफ नही उन चिरागों को हवाओं से बचाया जाये बाग मे जाने के अदब हुआ करते हैं … Continue reading
Posted in Deep Thinkers and Fools, Hindi Sahitya
4 Comments
इंदौर(मध्यप्रदेश) की यादे!!
Indore(Madhya Pradesh) ki Yaadain !! देश मालवा गहन गंभीर डग डग रोटी पग पग नीर – अमीर खुसरो Woh Cloth Market wale Ghanshyaam ki pani puri, woh 56 ki coffee, Woh Top’n Town ki ice cream, Wah usme thi kya … Continue reading
Posted in Deep Thinkers and Fools, Hindi Sahitya, Indian Culture, जिज्ञासा
1 Comment
मुश्किल है अपना मेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये तुम MA फर्स्ट डिविजन हो, मैं हुआ मेट्रिक फेल प्रिये मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही … Continue reading
Posted in Deep Thinkers and Fools, Hindi Sahitya
4 Comments
तिरंगा – सरदार तुक तुक
इस बार जैसे ही पन्द्रह अगस्त का दिन पास आया। हमारे दिमाग में एक जबरदस्त आइडि़या जगमगाया। चलो इस बार स्वतंत्रता दिवस घर पे मनाते हैं। अपने ही आंगन में तिरंगा फहराते हैं। सो हमने तिरंगा खरीदने के लिए मार्किट … Continue reading
Posted in Hindi Sahitya
Leave a comment
दीपावली की शुभकामनाएँ !
केवल छज्जों और चौबारों पर ही नहीं, आस्था का एक दीप हमारे रिश्तों की मुंडेर पर भी आजीवन जलता रहे इसी भावना के साथ दीपावली की शुभकामनाएँ ! – Infovinity Systems Pvt. Ltd. Tags: दीपावली
लड़का या लड़की – सरदार तुक तुक
एक बार हमने अपने पिता जी के ज़मीर को ललकारा। उन्होंने करा दिया ब्याह हमारा। बोले बेटा अब महीने भर बाद बात करेंगें। हमने कहा हम न किसी से डरे हैं न डरेंगे। पिता जी बोले बेटा शादी से पहले … Continue reading
Posted in Hindi Sahitya
Leave a comment