हमारे पुर्वजो – रिशि मुनियो ने काफ़ी सोच समझ के और कडे अनुसनधान के बाद ये सभी शब्द हमे दिये है, मेरे खयाल से इस तथ्य पर हम ध्यान दे तो भविष्य के कई महत्वपुर्ण सुत्र हमे प्राप्त हो सकते है।
कुछ सवाल जो मै अपने आप से लगातार पूछता हु ,कि
तीन देव क्यो है ? चार क्यो नही ?
१६ सन्स्कार ही क्यो ? ज्यादा कम क्यो नही ?
आप भी सोचिये शायद हम कुछ अर्थपुर्ण ढुन्ढ ले ?
अगर हम सब साहित्य को कहानी भी मान लेवे तो भी इतने सारे कथा कारो ने जैसे वेद व्यास , वाल्मिक आदी की कथाओ मै सभी देव समान क्यू है ?
क्यो विष्णु भगवान का तीसरा नैत्र नही है , बस शिव का ही है ?
मेरा ये द्र्ढ विशवास है कि इन सभी कथाओ के माध्यम से हमे व्रहद ज्ञान का कोष सोपा गया है, बस आप और हम इस को समझने का प्रयास करे और सफ़लता प्राप्त करे इसी उद्देश से मै सुदीप साकल्ले और मेरे साथी व मित्र प्रकाश खण्डेलवाल, ब्लोग जगत मे प्रवेश करते है। आशा है कि आप लोगो का सहयोग , मार्गदर्शन और आशिर्वाद हमे आगे बढने मै मदद करेगा
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एक ॐकार
माता – पिता
तीन देव – ब्रह्मा, विष्णु, महेश(शंकर)
चार वेद – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद
चार आश्रम – ब्रह्मचर्य, गृहस्त, वानप्रस्थ, सन्यास
चार धाम – बद्रीनाथ (उत्तर में), जगन्नाथपुरी (पूर्व में), रामेश्वरम (दक्षिण में), द्वारका (पश्चिम में)
चार पुरुषार्थ – धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष
चार वर्ण – ब्राहम्ण , क्षत्रिया , वैश्य , क्षुद्र
चार युग – कृतयुग (सत्युग), त्रेतायुग, द्वापरयुग , कलियुग (वर्तमान)
पंचामृत – दही (दधि) + दूध (दुग्ध) + घी (घृत) + मधु (शहद) + गंगाजल
छः शास्त्र – न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, वेदान्त
सप्त ऋषि – Atri, Brighu, Kutsya, Vasishtha, Gautam, Kashyapa and Angirasa
सप्त ऋषि तारा मण्डल – Kratu (Dubhe), Pulaha(Merak), Pulastya(Phecda), Atri(Megrez), Angira(Alioth), Vasishtha(Mizar), Marichi(Alkaid)
सात दिन – रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, वृहस्पतिवार (गुरुवार), शुक्रवार, शनिवार
आठ प्रकार के विवाह – ब्राह्म विवाह, दैत्य विवाह, ऋषि विवाह, प्रजापत्य विवाह, असुर विवाह, गान्धर्व विवाह, राक्षस विवाह, पैशाच विवाह
नव ग्रह – Sun (सूर्य), Moon (चंद्र), Mars (मंगल), Mercury (बुध), Jupiter (बृहस्पति), Venus (शुक्र), Saturn (शनि), Head of Demon Snake – Ascending/North Lunar Node (राहु), Tail of Demon Snake – Descending/South Lunar Node (केतु)
दस अवतार – Matsya, Kurma, Varaha, Narasimha, Vamana, Parashurama, Rama, Krishna, Buddha, Kalki
भारतीय मास (12) – चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद (भादो), अश्विन (क्वार), कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन
समुद्र मंथन में निकले चौदह रत्न – हलाहल (विष),कामधेनु (या सुरभि गाय), श्री मणि रम्भा वारुणी अमृत, ऐरावत, पाञ्चजन्य शंख, कल्पवृक्ष, चन्द्रमा, धन्वन्तरि, घोड़ा
सोलह संस्कार – (१) गर्भधारण संस्कार (२) पुंसवन (दुग्ध) संस्कार – तीसरे माह (३) सीमान्तनयन – छठवें माह (४) जन्म या जातकर्म – जन्म के समय किया जाने वाला (५) नामकरण(निष्क्रमण) – जन्म के कुछ दिनों बाद, शिशु को सूर्य का दर्शन कराकर उसे एक नाम प्रदान किया जाता है। (६) निस्करण (७) अन्नप्राशन – जब शिशु को सबसे पहले पकाया हुआ भोजन दिया जाता है। (८) मुंडन (९) कर्णभेदन या कर्णछेदन (१०) उपनयन – इसमें बालक को यज्ञोपवीत दिया जाता है और शिक्षा के लिये गुरू के पास भेजा जाता है। (११) वेदाध्ययन (वेद का अध्ययन) (१२) संवर्तन – शिक्षा समाप्ति के पश्चात (१३) विवाह (१४) वानप्रस्थ – पचास वर्ष की आयु की प्राप्ति पर (१५) सन्यास – प्राय: ७५ वर्ष की आयु की प्राप्ति पर (१६) दाह संस्कार – अन्तिम संस्कार
अठारह पूराण
1-Brahm Puraan, 2-Padm Puraan, 3-Vishnu Puraan, 4-Shiv Puraan, 5-Bhaagvat Puraan, 6-Naarad Puraan, 7-Maarkandeya Puraan, 8-Agni Puraan, 9-Bhavishya Puraan, 10-Brahm Vaivart Puraan, 11-Ling Puraan, 12-Vaaraah Puraan, 13-Skand Puraan, 14-Vaaman Puraan, 15-Koorm Puraan, 16-Matsya Puraan, 17-Garud Puraan, 18-Brahmaand Puraan,
सत्ताइस नक्षत्र – चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़, उत्तराषाढ़, सतभिषा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वभाद्र, उत्तरभाद्र, अश्विन, रेवती, भरणी, कृतिका, रोहणी, मृगशिरा, उत्तरा, पुनवर्सु, पुष्य, मघा, अश्लेशा, पूर्वफाल्गुन, उत्तरफाल्गुन, हस्त
Tags: जिज्ञासा, Vedic Science, Indian CultureRelated posts:
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एक सवाल मेरा भी है। इसे भी जोड़ लें। क्या शिव की तीसरी आंख – माथे के बीच में है, या कुछ दहिने, या बायें। मुझे इसका जवाब एक चिट्ठी लिखने के लिया चाहिये। यह जहां पर है वहां पर क्यों है। यदि इसका जवाब आपको मालुम हो तो कुछ इसके बारे में बतायें।
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वेदों में प्रयुक्त विभिन्न स्वरचिह्नों के युनिकोड मानकीकरण के
बारे में प्रस्तुत ड्राफ्ट यहाँ
पर हैं, अपना फीडबैक दें।
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वेदों में प्रयुक्त विभिन्न स्वरचिह्नों के युनिकोड मानकीकरण के
बारे में प्रस्तुत ड्राफ्ट
http://www.tdil.mit.gov.in/prop_uni/Vedica.pdf
पर हैं, अपना फीडबैक दें।
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@उन्मुक्त
तीसरी आँख भृकुटि के मध्य मानी जाती है। जो शरीर में आत्मा का निवासस्थल है। शिव की तीसरी आँख खुलने पर कामदेव रूप नकारात्मक तत्व भस्म हआ माना जाता है। अर्थात् आत्मानुभूति होने से समस्त शारीरिक/ऐहिक भोग विलास की इच्छाएँ भस्म हो जाती हैं।
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Namaste,
Aaapke knowledge bahut useful hai.
http://think-smile.blogspot.com/2009/02/science-is-proving-whatever-is-written.html
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